आज़माइशें
Author: Admin Labels:: आज़माइशेंज़िन्दगी में सुख और दुख, धूप और छाँव की तरह होते हैं. ये सच है कि अच्छे लोगों को ही सबसे ज़्यादा दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है. बेशक आज़माइशें उन्हीं लोगों पर आती हैं, जिन्हें अल्लाह तआला पसंद करता है. और अल्लाह की रज़ा में राज़ी रहने वाले लोग इन पर सब्र करते हैं और हर हाल में अपने परवरदिगार का शुक्र अदा करते हैं.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "मोमिन मर्द और औरत पर मुसलसल आज़माइशें आती रहती हैं. कभी उसकी ज़ात पर, तो कभी औलाद पर और कभी माल पर, यहाँ तक कि जब वह अल्लाह तआला से इस हाल में मुलाक़ात करता है कि उस पर कोई गुनाह बाक़ी नहीं रहता."
(सुनन तिर्मिज़ी इब्ने माजा 2399)
(सुनन तिर्मिज़ी इब्ने माजा 2399)
हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "आज़माइश जितनी सख़्त होती है, उसका सिला भी उतना ही बड़ा मिलता है, "
(रवा अल तिर्मिज़ी 239)
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जब कोई शख़्स किसी मुसीबत में मुब्तिला हो जाता है, तो अल्लाह तआला फ़रिश्तों से कहता है कि मेरा बन्दा जब तक मेरी आज़माइशों की क़ैद में है, तो तुम उस वक़्त तक उसके शब-व-रोज़ के नेकियों के मामलात लिखते रहो."
(मुसनद अहमद 8890)
इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि आज़माइश मोमिन की ज़ीनत है और अक़्लमन्द के लिए अज़मत है, क्योंकि आज़माइश का मोमिन के साथ रहना और मोमिन का उस पर सब्र करना और साबित क़दम रहना, उसके ईमान के सही होने की अलामत है.
(मुस्तदरक अल-वसाइल हदीस 2405)
इसलिए जब की किसी तरह की कोई आज़माइश आए, तो अल्लाह से दुआ करें.
