79 सूर: अन-नाज़ियात

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 46 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. उन फ़रिश्तों की क़सम
2. जो कुफ़्फ़ार की रूह को सख़्ती से खींच लेते हैं
3. और उनकी क़सम जो मोमिनों की जान आसानी से लेते हैं
4. और उनकी क़सम, जो आसमान और ज़मीन के बीच फिरते हैं
5. फिर एक के आगे बढ़ते हैं
6. फिर इंतज़ाम करते हैं कि क़यामत होकर रहेगी
7. जिस दिन ज़मीन पर भूचाल आएगा, फिर उसके पीछे ज़लज़ला आएगा
8. उस दिन दिल कांप रहे होंगे
9. उनकी आंखें झुकी होंगी
10. काफ़िर कहते हैं कि क्या हम वापस लौटेंगे
11. क्या हम हड्डियों का ढांचा हो जाएंगे
12. कहते हैं कि ये लौटना तो बहुत नुक़सानदेह है
13. वह तो एक सख़्त चीख़ होगी
14. और लोग देखेंगे कि वे एक मैदान में मौजूद हैं
15. क्या तुम्हारे पास मूसा का क़िस्सा भी पहुंचा है
16. जब उन्हें परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा
17. कि फ़िरऔन के पास जाओ, वह सरकश हो गया है
18. उससे कहो कि क्या तेरी ख़्वाहिश है कि पाक हो जाए
19. और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूं, तो तुझको ख़ौफ़ हो
20. फिर मूसा ने उसे मौजिज़ा दिखाया
21. तो उसने झुठला दिया और न माना
22. फिर पीठ फेरकर तदबीर करने लगा
23. फिर लोगों को जमा किया और बुलंद आवाज़ से चिल्लाया
24. और कहने लगा कि मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूं
25. खु़दा ने उसे दुनिया और आख़िरत के अज़ाब में गिरफ़्तार किया
26. बेशक, जो शख़्स ख़ुदा से डरे, उसके लिए इसमें इबरत है
27. भला तुम्हें पैदा करना ज़्यादा मुश्किल है या आसमान का
28. उसी ने उसको बनाया, उसकी छत को ख़ूब ऊंचा रखा
29. फिर दुरुस्त किया और उसकी रात को स्याह और दिन को धूप निकाली
30. और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
31. उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
32. और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
33. ये सब तुम्हारे और तुम्हारे चारपायों के फ़ायदे के लिए है
34. जब बड़ी सख़्त मुसीबत आ जाएगी
35. जिस दिन इंसान अपने कामों को कुछ याद करेगा
36. और दोज़ख़ देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
37. जिसने दुनिया में सर उठाया था
38. और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह दी थी
39. उसका ठिकाना तो यक़ीनन दोज़ख़ है
40. मगर जो शख़्स अपने परवरदिगार के सामने खड़े होने से डरता रहा और ख़ुद को नाजायज़ ख़्वाहिशों से रोकता रहा
41. तो यक़ीनन उसका ठिकाना जन्नत है
42. तुम लोगों से क़यामत के बारे में पूछते हो
43. कि उसके बयान से तुम्हारा किया ताल्लुक़ है
44. तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में हो
45. तुम उस शख़्स को बाख़बर करने वाले हो, जो उससे डरे
46. जिस दिन लोग इसे देखेंगे, तो समझेंगे कि दुनिया में बस एक शाम या सुबह ठहरे थे
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान 

0 comments |

80 सूर: अ-ब-स

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 42 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. उसने मुंह फुला लिया
2. और मुंह फेर कर बैठ गया, क्योंकि उसके पास नाबीना आ गया
3. और तुम्हें क्या मालूम शायद वह तुमसे ज़्यादा पाकीज़ा हो
4. या वह नसीहत सुनता हो, तो नसीहत उसके काम आती हो
5. इसलिए वह कोई परवाह नहीं करता
6. तुम उसके पीछे पड़ जाते हो, हालांकि अगर वह न सुधरे
7. तो तुम ज़िम्मेदार नहीं
8. और जो तुम्हारे पास दौड़ता हुआ आता
9. और वह ख़ुदा से डरता है
10. तो तुम उससे बेरुख़ी करते हो
11. देखो ये क़ुरआन तो सरासर नसीहत है
12. तो जो चाहो, इसे याद रखो
13. बहुत मुअज़िज़ औराक़ पर लिखा है
14. बुलंद मर्तबा और पाक है
15. लिखने वालों के हाथों में है
16. जो नेक बुज़ुर्ग हैं
17. इंसान मर जाए, वह कैसा नाशुक्रा है
18. ख़ुदा ने उसे किस चीज़ से पैदा किया
19. नुत्फ़े से उसे पैदा किया, फिर उसका अंदाज़ा मुक़र्रर किया
20. फिर उसकी राह आसान कर दी
21. फिर उसे मौत दी, फिर उसे क़ब्र में दफ़न कराया
22. फिर जब चाहेगा, उठाकर खड़ा कर देगा
23.सच तो ये है कि ख़ुदा ने जो हुक्म दिया, उसने उसे पूरा किया
24. इंसान को अपने नु़कसान के बारे में ग़ौर करना चाहिए
25. हमने ख़ूब पानी बरसाया
26. फिर हमने ज़मीन को चीरा-फाड़ा
27. फिर हमने उसमें अनाज उगाया
28. और अंगूर और तरकारियां
29. और ज़ैतून और ख़जूर
30. और घने बाग़ और मेवे
31. और चारा तुम्हारे और तुम्हारे
32. चारपायों के लिए
33. और जब बहरा कर देने वाली तेज़ आवाज़ आएगी
34. उस दिन इंसान अपने भाई
35. और अपनी मां और अपने बाप
36. और अपने बीवी-बच्चों से भागेगा
37. उस दिन हर शख़्स सिर्फ़ अपनी ही फ़िक्र में लगा होगा
38. बहुत से चेहरे तो उस दिन चमक रहे होंगे
39. हंसते हुए और ख़ुशनुमा होंगे
40. और बहुत से चेहरों पर धूल पड़ी होगी
41. उन पर स्याही छाई होगी
42. यही कुफ़्फ़ार और बदकार हैं
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान

0 comments |

81 सूर: अत-तक्वीर

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 29 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. जिस वक़्त सूरज की चादर को लपेट लिया जाएगा
2.  और जिस वक़्त तारे गिर पड़ेंगे
3. और जब पहाड़ चलाए जाएंगे
4. जब प्रसव के क़रीब पहुंची गाभिन ऊंटनियां बेकार कर दी जाएंगी
5. और जिस वक़्त जंगली जानवर इकट्ठे किए जाएंगे
6. और जिस वक़्त समन्दर आग हो जाएगा
7. और जिस वक़्त रूहों के जोड़े बना दिए जाएंगे
8. और जिस वक़्त ज़िन्दा दफ़नाई लड़की से पूछा जाएगा
9. कि उसे किस गुनाह की वजह से मारा गया
10. और जिस वक़्त आमाल के दफ़्तर खोले जाएंगे
11. और जिस वक़्त आसमान का छिलका उतारा जाएगा
12. और जब दोज़ख़ की आग भड़काई जाएगी
13. और जब जन्नत क़रीब कर दी जाएगी
14. तब हर शख़्स को मालूम हो जाएगा कि वह क्या आमाल लेकर आया है
15. मुझे उन सितारों की क़सम, जो चलते-चलते पीछे हट जाते हैं
16. और ग़ायब होते हैं
17. और रात की क़सम, जब ख़त्म होने वाली हो
18. और सुबह की क़सम, जब रौशन हो जाए
19. बेशक ये क़ुरआन एक मुअज़िज़ फ़रिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है
20. ताक़तवर और आसमान के मालिक की बारगाह में जिसका बुलंद रुतबा है
21. वहां सब फ़रिश्तों का सरदार और अमानतदार है
22. और तुम्हारे साथी मुहम्मद दीवाने नहीं हैं
23. बेशक उन्होंने जिबरील को आसमान के किनारे पर देखा है
24. और वह ग़ैब की बातों को ज़ाहिर करने में बख़ील नहीं हैं
25.और न ये मरदूद शैतान का क़ौल है
26. फिर तुम कहां जा रहे हो ?
27. ये सारे जहां के लोगों के लिए बस नसीहत है
28. बस उसी के लिए जो तुम में से सही राह चले
29. और तुम सारे जहां के पालने वाले पर ख़ुदा की मर्ज़ी के बग़ैर कुछ नहीं कर सकते
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान 

0 comments |

Dhuhaa Salaat - Chasht (Breakfast prayer)

Author: Admin Labels:: , , ,


When the sun has risen high and there is heat in its rays, the performance of 2,4, 6,8 or 12 rakaats is called Namaaz-e-Chaast. This is full of countless rewards.

The Traditions says that the performance of 2 rakaats wipes away all ones sins. There are 360 joints in our body and to pay Sadakah for each is Wajib (obligatory) The 2 rakaaats is enough to pay all the Sadakah. Performance of 4 rakaats places the performer's name among the Abids and is the Sunnat of Saliheen and promise the performer protection until the evening. The performer of 6 rakaats is relieved of his day's worries. Performance of 8 rakaats places his name among the Parhezgaars and the performer of 12 rakaats ensures a Golden Mansion or castle for himself in Paradise. (Ref : Tirmizi, Ibne Majah, Ahmad and Abu Yala)

The Mustahabb (preferred) time of performing Salat al-Dhuhaa is after 1/4 of the day has passed. This is deduced from a Hadith of Muslim. (Halabi; Sharah Kabeer pg.390). From many Ahaadith, we understand that Salat al-Dhuhaa should be performed after the sun has risen quiet high. Because the Fuqahaa and Muhadditheen are of the opinion that the commencement of the time of Salat al-Dhuhaa is the same as that of Ishraaq (i.e. immediately after sunrise), the Ulama have stated that 'if due to lack of time, one performs the Salat of Ishraaq and Dhuhaa together at one time, that too will be correct.' (Our Namaas pg.44)

Rasulullah is reported to have said, 'Whoever offers 2 Rakaats of Salat al-Dhuhaa, all his sins will be forgiven even though they are as much as the foam of the sea.' (Ibid)

It is reported that Sayyidna Aaisha (Radhiallaahu Anha) used to perform 8 Rakaats of Salat al-Dhuhaa. She said that even if her parents arose from the grave, she would not leave Salat al-Dhuhaa to go and meet them. (Ibid).

'Salat al-Dhuhaa consists of 2 - 12 Rakaats and it is preferable to perform 8 Rakaats.' (Raddul Mukhtaar vol.1 pg.505)


The Prophet (sallallahu alaiyhi wassallam) is reported to have said that Whoever prayed twelve rakaats at the time of Chasht, then Allah will, as reward, prepare a palace of gold for him in Paradise. [Mishkat, Tirmizi, Ibn Majah]

Courtesy amazonintl

0 comments |

Prayer of Ishraq (Sunrise prayer)

Author: Admin Labels:: , , ,


The beloved Prophet (sallal laahu alaihi wasallam) has said: Those who perform the Fajr prayer in congregation (Jamaa’at), read the Zikr (remembrance of Allah) till the sun has completely arisen (length of a spear from the horizon, after 20 minutes of sunrise) and read 2 Raka-at Nafil prayer, will have the benedictions (sawaab) equal to those of Haj-Umrah. It is recommended to read the Surah Fateha and Ayyat-uk-Kursi till Khaalidoon, in the first Raka-at, and in the second Raka-at to read, after Surah Fateha, Aamanar Rasul till the end of Suratul Baqarah. In the case that this verse cannot be read from memory, one can recite any other verse and then ask Duas. Woman should read all prayers of Farz and Nafil at home and will derive the same benefits (sawaab) that accrue from prayer performed at the  Masjid (Tirmizi Shareef).

The Prophet (sallallahu alaiyhi wassallam) is reported to have said that Whoever, after finishing Fajr salat, kept sitting at the place of prayer, and prayed the Ishraq salat before getting up from there, provided he did not engage in any worldly act or conversation during that time, and instead, remained in Allah's Zikr (remembrance), then all his sins are forgiven, even if they are as much as the foarn of the ocean. [Abu Da'ud] The scholars have written that during this time, the person should take care to sit facing the Qiblah. Sheikh Shahabuddin Soharwardi  (Rahmatullahi Allaih) used to say that the action whose reward is obtained right away in this world, is that a person, after Fajr salat, facing Qiblah, does Zikr of Allah until Ishraq. After a few days the person will gain inner spiritual light (Nuraniyat).

Rasulullah is reported to have said that Allah Ta'ala says, 'O son of Aadam, perform 4 Rakaats of Salat (Ishraaq) in the early part of the day. I shall help you in accomplishing all your responsibilities during the rest of the day.' (Mishkaat pg.116)

In another narration of Tirmidhi, Rasulullah is reported to have said, 'He who performs Fajr Salat with Jamaat and remains seated in the same place while engaging in Dhikr until after sunrise and thereafter performs 2 Rakaats Nafil Salat, (Ishraaq), he will obtain the Thawaab of one Hajj and one Umrah.' (Tirmidhi).

Courtesy amazonintl

0 comments |

चाश्त की नमाज़

Author: Admin Labels:: , , , ,


चाश्त की नमाज़ का सही वक़्त आफ़ताब के ख़ूब तलू हो जाने पर शुरू होता है. चाश्त में  कम से कम दो और ज़्यादा से ज़्यादा 12 अकअत पढ़ी जाती हैं.
प्यारे नबी हज़रत मुहम्‍मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्‍लम) चाश्त की चार रकअत पढ़ते थे और अल्लाह जिस क़द्र चाहता, उतनी पढ़ लेते. (मुस्लिम 719)
नबी हज़रत मुहम्‍मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्‍लम) ने फ़रमाया- जो शख़्स चाश्त की दो रकअत को हमेशा पढ़ता रहे, उसके गुनाह बख़्श दिए जाएंगे, अगर्चे वोह समन्दर के झाग के बराबर हों.

0 comments |

82 सूर: अल- इंफ़ितार

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 19 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. जब आसमान तर्ख़ जाएगा
2. जब तारे झड़ जाएंगे
3. और जब दरिया बह कर एक दूसरे में मिल जाएंगे
4. और जब क़ब्रें उखाड़ दी जाएंगी
5. तब हर शख़्स को मालूम हो जाएगा कि उसने आगे क्या भेजा था और पीछे क्या छोड़ा था
6. ऐ इंसान ! तुझे अपने परवरदिगार के बारे में किस चीज़ ने धोखे में डाल रखा है ?
7. जिसने तुझे पैदा किया, तो दुरुस्त बनाया और मुनासिब आज़ा दिए
8. और जिस सूरत में उसने चाहा, तुझे जोड़ कर तैयार किया
9. हां, बात ये है कि तुम लोग फ़ैसले के दिन को झुठलाते हो
10. हालांकि तुम पर निगेहबान मुक़र्रर हैं
11. बुज़ुर्ग और लिखने वाले लोग
12. जो कुछ तुम करते हो, वे सब जानते हैं
13. बेशक नेक लोग जन्नत में ख़ुशहाल होंगे
14. और बदकार लोग जहन्नुम में
15. जिसमें वे क़यामत के दिन झोंके जाएंगे
16. और वे लोग उससे छुप न सकेंगे
17. और तुम्हें क्या मालूम कि फ़ैसले का दिन क्या है?
18. फिर तुम्हें क्या मालूम कि फ़ैसले का दिन क्या चीज़ है
19. उस दिन कोई शख़्स किसी शख़्स का भला न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ़ ख़ुदा ही का
 होगा
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान

0 comments |

83 सूर: अल-मुत्ताफ़िकीन

Author: Admin Labels:: , ,

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 36 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. नाप तौल में कमी करने वालों के लिए तबाही है
2. जो औरों से नाप कर लें, तो पूरा पूरा लें
3.  और जब उनको नाप या तौल कर दें, तो कम कर दें
4. क्या ये लोग इतना भी ख़्याल नहीं करते
5. कि एक सख़्त (क़यामत) दिन में उठाए जाएंगे
6. जिस दिन सभी लोग सारी दुनिया के परवरदिगार के सामने खड़े होंगे
7. सुनो, बदकारों के नाम-ए-आमाल सिज्जीन में हैं
8. तुम्हें क्या मालूम कि सिज्जीन क्या है ?
9. एक लिखा हुआ दफ़्तर है, जिसमें बदकारों के आमाल दर्ज हैं
10. उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है
11. जो लोग फ़ैसले के दिन को झुठकाते हैं
12. हालांकि उसे हद से गुज़र जाने वाले गुनाहगार के सिवा कोई नहीं झुठलाता
13. जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो वह कहता है कि ये तो पहले के अफ़साने हैं
14. नहीं बात ये है कि इन लोगों के आमाल का उनके दिलों पर ज़ंग लग गया है
15. बेशक ये लोग उस दिन अपने परवरदिगार की रहमत से रोक दिए जाएंगे
16. फिर ये लोग जहन्नुम में दाख़िल होंगे
17. फिर उनसे कहा जाएगा कि ये वही चीज़ है, जिसे तुम झुठलाया करते थे
18. ये भी सुनो कि नेक लोगों के नाम-ए-आमाल इल्लीयीन में होंगे
19. और तुम्हें क्या मालूम कि इल्लीयीन क्या है, वह एक लिखा हुआ दफ़्तर है
20. जिसमें नेक लोगों के आमाल दर्ज हैं
21. उसके पास फ़रिश्ते हाज़िर हैं
22. बेशक नेक लोग ख़ुशहाल होंगे
23. तख़्तों पर बैठे देख रहे होंगे
24. तुम उनके चेहरों से ही राहत की ताज़गी महसूस कर लोगे
25. उन्हें मुहरबंद ख़ालिस शराब पिलाई जाएगी
26. जिसकी मुहर मुश्क की होगी और शौक़ीन को उसे पहले हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए
27. और उसमें तसनीम का पानी मिला होगा
28. वह एक चश्मा है, जहां मुक़रेबीन पिएंगे
29. बेशक जो गुनाहगार मोमिनों पर हंसा करते थे
30. और जब उनके पास से गुज़रते, तो उन पर चशमक करते
31. और जब अपने लोगों की तरफ़ लौट कर आते, तो इतराते
32. और जब उन मोमिनों को देखते, तो उन्हें गुमराह क़रार देते
33. हालांकि ये लोग उन पर निगरां बनाकर तो भेजे नहीं गए थे
34. तो आज मोमिन काफ़िरों पर हंसेंगे
35. तख़्तों पर बैठे देख रहे होंगे
36. अब काफ़िरों को उनके किए की सज़ा मिल गई
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान


0 comments |

84. सूर: अल-इंशिक़ाक़

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 25 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. जब आसमान फट जाएगा
2. और अपने परवरदिगार का हुक्म पूरा करेगा, जो वाजिब भी है
3. और जब ज़मीन तान दी जाएगी
4. और जो कुछ उसमें है, वह उसे उग़ल कर ख़ाली हो जाएगी
5. और अपने परवरदिगार का हुक्म पूरा करेगी
6. उस पर लाज़िम भी यही है, ऐ इंसान! तू अपने परवरदिगार की तरफ़ खिंचा चला जा रहा है
7. एक दिन वह ख़ुदा के सामने हाज़िर होगा, फिर आमाल नामा उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा
8. उससे तो हिसाब आसान तरीक़े से लिया जाएगा
9. और फिर वह अपने क़बीले की तरफ़ ख़ुशी ख़ुशी पलटेगा
10. लेकिन जिस शख़्स को उसका आमाल नामा उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा
11. वह मौत की दुआ करेगा
12. वह जहन्नुम में दाख़िल होगा
13. ये शख़्स तो अपनों में मस्त रहता था
14. और समझता था कि वह कभी ख़ुदा की तरफ़ जाएगा ही नहीं
15. हां, उसका परवरदिगार उसे देख रहा था
16. मुझे शाम की सुर्ख़ी की क़सम
17. और रात की उन चीज़ों की, जिन्हें वह ढंक लेती है
18. और चांद की जब वह पूरा हो जाए
19. तुम लोग ज़रूर एक सख़्ती के बाद दूसरी सख़्ती में फंसोगे
20. फिर उन लोगों को क्या कहोगे, जो ईमान नहीं लाते
21. और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो वे ख़ुदा को सजदा नहीं करते
22. बल्कि काफ़िर लोग तो उसे झुठलाते हैं
23.  और जो बातें, ये लोग दिल में छुपाते हैं, उन्हें ख़ुदा ख़ूब जानता है
24. तो उन्हें तकलीफ़देह अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
25. मगर जो ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए, उनके लिए बेइंतिहा अज्र है
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान

0 comments |

85. सूर: अल-बुरुज

Author: Admin Labels::

मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 22 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1. बुर्जों वाले आसमान की क़सम
2. और उस दिन की, जिसका वादा किया गया है
3. और उस गवाह की, और जिसकी गवाही दी जाएगी
4. उसकी (कुफ़्फ़ार मक्का में हलाक हुए) जिस तरह ख़ंदक वाले हलाक कर दिए गए
5. जो ख़ंदकें आग की थीं
6. जिसमें (उन्होंने मुसलमानों के लिए) ईंधन झोंक रखा था
7. वे उन ख़ंदकों पर बैठे हुए, वह सब देखेंगे, जो सुलूक उन्होंने ईमानवालों के साथ किया था
8. और उन्हें मोमिनों को यही बात बुरी लगी थी कि वे ख़ुदा पर ईमान लाए, जो बड़ा ताक़तवर और तारीफ़ के क़ाबिल है
9. वह ख़ुदा जिसकी सारे आसमानों और ज़मीन पर बादशाहत है और वह हर चीज़ से वाक़िफ़ है
10. बेशक जिन लोगों ने नेक मर्दों और औरतों को तकलीफ़ें दीं, फिर तौबा न की, उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही, साथ ही जलने का अज़ाब भी होगा
11. बेशक, जो लोग ईमान लाए और नेक काम करते रहे, उनके लिए वे बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बहती हैं, यही तो बड़ी कामयाबी है
12. बेशक, तुम्हारे परवरदिगार की पकड़ बहुत सख़्त है
13. वही पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा क़यामत के दिन ज़िन्दा करेगा
14. और वही बड़ा बख़्शने वाला, मुहब्बत करने वाला है
15. अर्श का मालिक बड़ा आलीशान है
16. जो चाहता है, करता है
17. क्या तुम्हारे पास लश्करों की ख़बर पहुंची है
18. फ़िरऔन और समूद की ?
19. मगर कुफ़्फ़ार तो झुठलाने में लगे हैं
20. और ख़ुदा उनको पीछे से घेरे हुए है
21. बल्कि ये तो क़ुरआन मजीद है
22. जो लौहे-महफ़ूज़ में लिखा हुआ है
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान

0 comments |

بسم الله الرحمن الرحيم

بسم الله الرحمن الرحيم

Allah hu Akbar

Allah hu Akbar
अपना ये बलॊग हम अपने पापा मरहूम सत्तार अहमद ख़ान को समर्पित करते हैं...
-फ़िरदौस ख़ान

This blog is devoted to my father Late Sattar Ahmad Khan...
-Firdaus Khan

इश्क़े-हक़ी़क़ी

इश्क़े-हक़ी़क़ी
फ़ना इतनी हो जाऊं
मैं तेरी ज़ात में या अल्लाह
जो मुझे देख ले
उसे तुझसे मुहब्बत हो जाए

List

Popular Posts

Followers

Follow by Email

Translate

Powered by Blogger.

Search This Blog

इस बलॊग में इस्तेमाल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं
banner 1 banner 2