इल्मे-सीना

Author: Admin Labels:: ,

इल्मे-सीना के बारे में बहुत कम लोग जानना चाहते हैं... दरअसल, इल्मे-सीना आपको किताबों में नहीं मिलता... इसे समझना पड़ता है... और इसे समझने के लिए एक रौशन ज़ेहन और वसीह दिल चाहिए...
जिस तरह पानी को साफ़ रखने के लिए साफ़ बर्तन की ज़रूरत होती है, उसी तरह इल्मे-सीना के लिए भी दिल का साफ़ होना बेहद ज़रूरी है... इसके लिए एक ऐसा दिल चाहिए, जो ख़ुदग़र्ज़ न हो, कमज़र्फ़ न हो... इतनी समझ चाहिए कि इंसान समझ सके कि क्या सही है और क्या ग़लत है...
 इसके लिए ऊंच-नीच, जात-पांत और किसी भी तरह के भेदभाव से ऊपर उठना होगा... ख़ुदा की मख़लूक से नफ़रत करके ख़ुदा को नहीं पाया जा सकता...
कबीर चचा कह गए हैं-
पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय...
यक़ीन करें, जिसने प्रेम के ढाई आखर पढ़ लिए और समझ लिए, उसका बेड़ा पार हो गया...

0 comments |

हज़रत अली अलैहिस्सलाम

Author: Admin Labels::



सुनहरे अक़वाल
हज़रत अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं-
* अपने ख़्यालों की हिफ़ाज़त करो, क्योंकि ये तुम्हारे अल्फ़ाज़ बन जाते हैं
अपने अल्फ़ाज़ की हिफ़ाज़त करो, क्योंकि ये तुम्हारे आमाल बन जाते हैं
अपने आमाल की हिफ़ाज़त करो, क्योंकि ये तुम्हारा किरदार बन जाते हैं
अपने किरदार की हिफ़ाज़त करो, क्योंकि तुम्हारा किरदार तुम्हारी पहचान बन जाता है.

* अपनी सोच को पानी के कतरों से भी ज़्यादा साफ़ रखो, क्योंकि जिस तरह क़तरों से दरिया बनता है उसी तरह सोच से ईमान बनता है.

रब 
* सारी दुनिया के सारे लोग तुझे अपने फ़ायदे के लिए चाहते हैं, सिर्फ़ तेरा रब ही है, जो तुझे तेरे फ़ायदे के लिए चाहता है. 

क़ुरआन 
क़ुरआन पढ़ा करो. बेशक रब ने इसमें हर मसले का हल रखा है.   

मुहब्बत
* नमाज़ में किसी के लिए दुआ करना और उसे इल्म भी न हो, बस यही सच्ची मुहब्बत है.  
* जिससे मुहब्बत की जाए, उसका फ़रमाबरदार होना पड़ता है 
* जिस्मानी रिश्ते मुख़्तसर ज़िन्दगी तक महदूद होते हैं. आख़िरत में हम उनके साथ होंगे, जिनसे हमें रूहानी मुहब्बत होगी.   
* किसी मुकम्मल शख़्स की तलाश में मुहब्बत न करो, बल्कि किसी अधूरे को मुकम्मल करने के लिए मुहब्बत करो.
* ख़ूबसूरत इंसान से मुहब्बत नहीं होती, बल्कि जिस इंसान से मुहब्बत होती है वो ख़ूबसूरत लगने लगता है.
*जिससे मुहब्बत की जाती है, उससे मुक़ाबला नहीं किया जाता. किसी को पा लेना मुहब्बत नहीं, बल्कि उसके दिल में जगह बना लेना मुहब्बत है.
* हमेशा उस इंसान के क़रीब रहो जो तुम्हे ख़ुश रखे, लेकिन उस इंसान के और भी क़रीब रहो जो तुम्हारे बग़ैर ख़ुश ना रह पाए.

अल्लाह से माँगना 
* अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी होने से बड़ी मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं.
* ख़ालिक से मांगना शुजाअत है. अगर दे तो रहमत और न दे तो हिकमत. मखलूक से मांगना ज़िल्लत है. अगर दे तो एहसान और ना दे तो शर्मिंदगी.

ज़िन्दगी
* अगर ज़िन्दगी को ख़ूबसूरत बनाना है, तो बर्दाश्त करना सीखो, नज़र अंदाज़ करना सीखो, ख़ामोश रहना सीखो और अकेले जीना सीखो.  
* ज़िन्दगी जब भी रुलाये तो समझ लेना कि गुनाह माफ़ हो गए और ज़िन्दगी जब भी हंसाये तो समझ लेना कि दुआ क़ुबूल हो गईं.  

* जो शख़्स दुनिया में कम हिस्सा लेता है, वो अपने लिए राहत का सामान बढ़ा लेता है. और जो दुनिया को ज़्यादा समेटता है, वो अपने लिए तबाहकुन चीज़ों का इज़ाफ़ा कर लेता है.
* जिसकी अमीरी उसके लिबास में हो, वो हमेशा फ़क़ीर रहेगा और जिसकी अमीरी उसके दिल में हो वो हमेशा सुखी रहेगा.

बेहतरीन इंसान 
* नेक अमल जैसी कोई तिजारत नहीं और सवाब जैसा कोई मुनाफ़ा नहीं. 
* बेहतरीन इंसान अपने अमल से पहचना जाता है, वरना अच्छी बातें तो बुरे लोग भी करते हैं.  
* मुश्किलतरीन काम बेहतरीन लोगों के हिस्से में आते हैं, क्योंकि वो उसे हल करने की सलाहियत रखते हैं.

दोस्ती 
* अच्छे वक़्त से ज़्यादा अच्छा दोस्त अज़ीज़ रखो, क्योंकि अच्छा दोस्त बुरे वक़्त को भी अच्छा बना देता है.
* दोस्तों का इंतख़ाब सोच-समझकर किया करो, क्योंकि तुम अपने जनाज़े की पहली सफ़ का इंतख़ाब कर रहे हो.
* दुनिया में हज़ार रिश्ते बनाओ, लेकिन एक रिश्ता ऐसा भी बनाओ जब हज़ार रिश्ते आपके ख़िलाफ़ खड़े हों, तो वह एक आपके साथ हो.
* लम्बी दोस्ती के लिए दो चीज़ों पर अमल करो
- अपने दोस्त से ग़ुस्से में बात मत करो
- अपने दोस्त की ग़ुस्से में कही हुई बात दिल पर मत लो.

आज़माना 
* अगर किसी का जर्फ़ आज़माना हो, तो उसको ज़्यादा इज़्ज़त दो. वह आला ज़र्फ़ हुआ तो आपको और ज़्यादा इज़्ज़त देगा और कम ज़र्फ़ हुआ तो ख़ुद को आला समझेगा.
* अगर किसी के बारे मे जानना चाहते हो तो पता करो के वह शख्स किसके साथ उठता बैठता है

इल्म 
* इल्म की वजह से दोस्तों में इज़ाफ़ा होता है, दौलत की वजह से दुशमनों में इज़ाफ़ा होता है.
* दौलत, हुक़ूमत और मुसीबत में आदमी के अक़्ल का इम्तेहान होता है कि आदमी सब्र करता है या ग़लत क़दम उठाता है.
* दौलत को क़दमों की ख़ाक बनाकर रखो, क्यूकि जब ख़ाक सर पर लगती है तो वो क़ब्र कहलाती है.

सब्र
* सब्र एक ऐसी सवारी है, जो सवार को अभी गिरने नहीं देती. 
* सब्र से जीत तय हो जाती है.
* ऐसा बहुत कम होता है कि जल्दबाज़ नुक़सान न उठाए, और ऐसा हो ही नहीं सकता कि सब्र करने वाला नाक़ाम हो.

* झूठ बोलकर जीतने से बेहतर है सच बोलकर हार जाओ.

मुक़ाम 
* जब तुम्हरी मुख़ालफ़त हद से बढ़ने लगे, तो समझ लो कि अल्लाह तुम्हें कोई मुक़ाम देने वाला है.
*इस सोच के साथ ज़िन्दगी में आगे बढ़ो कि अल्लाह ने यक़ीनन बेहतरीन ही सोचा होगा. 
* ज़िन्दगी में आगे बढ़ना है, तो बहरे हो जाओ, क्योंकि बाज़ लोगों की बातें मायूसी में इज़ाफ़ा कर देती हैं. 

नींद 
* सुबह की नींद इंसान के इरादों को कमज़ोर करती है. मंज़िलों को हासिल करने वाले कभी देर तक सोया नहीं करते. 

लालच 
* जहां तक हो सके लालच से बचो, लालच में ज़िल्लत ही ज़िल्लत है.

कम खाना 
* कम खाने में सेहत है, कम बोलने में समझदारी है और कम सोना इबादत है.


आँसू 
* किसी की आंख तुम्हारी वजह से नम न हो, क्योंकि तुम्हे उसके हर इक आंसू का क़र्ज़ चुकाना होगा 
* तुम्हारा एक रब है फिर भी तुम उसे याद नहीं करते, लेकिन उस के कितने बंदे हैं फिर भी वह तुम्हे नहीं भूलता.

* सूरत बग़ैर सीरत के ऐसा फूल है, जिसमे कांटे ज़्यादा हों और ख़ुशबू बिलकुल न हो.
* आज का इंसान सिर्फ़ दोलत को ख़ुशनसीबी समझता है और ये ही उसकी बदनसीबी है.
 * कभी भी किसी के ज़वाल को देखकर ख़ुश मत हो, क्योंकि तुम्हे पता नहीं है मुस्तक़बिल में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है.

सलीक़ा 
* बात तमीज़ से और ऐतराज़ दलील से करो, क्योंकि जबान तो हैवानो में भी होती है मगर वह इल्म और सलीक़े से महरूम होते हैं.

* अक़्लमंद अपने आप को नीचा रखकर बुलंदी हासिल करता है और नादान अपने आप को बड़ा समझकर ज़िल्लत उठाता है.

लफ़्ज़ 
* लफ़्ज़ आपके गुलाम होतें हैं. मगर सिर्फ़ बोलने से पहले तक, बोलने के बाद इंसान अपने अल्फ़ाज़ का ग़ुलाम बन जाता है. अपनी ज़बान की हिफ़ाज़त इस तरह करो, जिस तरह तुम अपने माल की करते हो. एक लफ़्ज़ ज़लील कर सकता है और आपके सुख को ख़त्म कर सकता है.

*दिल का रोज़ा ज़ुबान के रोज़े से और ज़ुबान का रोज़ा पेट के रोज़े से बेहतर है.

इज़्ज़त
* लोगों से डरना छोड़ दो, क्योंकि रिज़्क़ और इज़्ज़त किसी के हाथ में नहीं, अल्लाह जिसे चाहे बेहिसाब देता है.     

ज़ुल्म 
* जो ज़ुल्म के ज़रिये इज़्ज़त चाहता है, अल्लाह उसे इंसाफ़ के ज़रिये ज़लील करता है.



0 comments |

लाइलाज बीमारियों और जादू-जिन्नात का इलाज

Author: Admin Labels::

 लाइलाज बीमारियों और जादू-जिन्नात का इलाज

0 comments |

या हुसैन

या हुसैन

بسم الله الرحمن الرحيم

بسم الله الرحمن الرحيم

Allah hu Akbar

Allah hu Akbar
अपना ये रूहानी ब्लॉग हम अपने पापा मरहूम सत्तार अहमद ख़ान और अम्मी ख़ुशनूदी ख़ान 'चांदनी' को समर्पित करते हैं.
-फ़िरदौस ख़ान

This blog is devoted to my father Late Sattar Ahmad Khan and mother Late Khushnudi Khan 'Chandni'...
-Firdaus Khan

इश्क़े-हक़ी़क़ी

इश्क़े-हक़ी़क़ी
फ़ना इतनी हो जाऊं
मैं तेरी ज़ात में या अल्लाह
जो मुझे देख ले
उसे तुझसे मुहब्बत हो जाए

List

My Blog List

  • नाम का पास - फ़िल्म 'गाइड' में नायक राजू को रात में ठंड से ठिठुरता देखकर कोई उसे ज़र्द कपड़ा ओढ़ा जाता है. इसी कपड़े की वजह से गांववाले उसे संत-महात्मा समझ लेते हैं. वह गा...
  • उमरपुरा के सिख भाइयों ने बनवाई मस्जिद - *डॉ. फ़िरदौस ख़ान * हमारे प्यारे हिन्दुस्तान की सौंधी मिट्टी में आज भी मुहब्बत की महक बरक़रार है. इसलिए यहां के बाशिन्दे वक़्त-दर-वक़्त इंसानियत, प्रेम और भाई...
  • Sayyida Fatima al-Zahra Salamullah Alaiha - On this blessed 20th of Jamadi al-Thani, we celebrate the birth of Sayyida Fatima al-Zahra alamullah Alaiha — the Lady of Light, the Mother of the Imams,...
  • میرے محبوب - بزرگروں سے سناہے کہ شاعروں کی بخشش نہیں ہوتی وجہ، وہ اپنے محبوب کو خدا بنا دیتے ہیں اور اسلام میں اللہ کے برابر کسی کو رکھنا شِرک یعنی ایسا گناہ مانا جات...
  • 27 सूरह अन नम्ल - सूरह अन नम्ल मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 93 आयतें हैं. *अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है*1. ता सीन. ये क़ुरआन और रौशन किताब की आयतें...
  • ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ - ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ ਕਿਤੋਂ ਕਬੱਰਾਂ ਵਿਚੋਂ ਬੋਲ ਤੇ ਅੱਜ ਕਿਤਾਬੇ-ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਕੋਈ ਅਗਲਾ ਵਰਕਾ ਫੋਲ ਇਕ ਰੋਈ ਸੀ ਧੀ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਤੂੰ ਲਿਖ ਲਿਖ ਮਾਰੇ ਵੈਨ ਅੱਜ ਲੱਖਾਂ ਧੀਆਂ ਰੋਂਦੀਆਂ ਤ...

Popular Posts

Followers

Translate

Powered by Blogger.

Search This Blog

इस बलॊग में इस्तेमाल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं
banner 1 banner 2