क़ुरआन पढ़ने की फ़ज़ीलत

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डॉ. फ़िरदौस ख़ान 
अल्लाह तआला की पाक किताब क़ुरआन करीम पढ़ने बेहिसाब सवाब है.   
आज हम क़ुरआन करीम से वाबस्ता चन्द हदीसें आप सबके साथ साझा कर रहे हैं.   

अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स क़ुरआन पढ़ता हो और उसमें माहिर हो, तो वह बड़ी इज़्ज़त वाले फ़रिश्तों और पैग़म्बरों के साथ होगा और जो शख़्स अटक-अटक कर परेशानी के साथ पढ़े, तो उसे दोहरा सवाब मिलेगा."
(अबू दाऊद)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "सुन लो तुममें से जो शख़्स मस्जिद जाता है और वहाँ अल्लाह की किताब की दो आयतें किसी को सिखाता है या ख़ुद पढ़ता है, तो उसके लिए दो ऊंटों से बेहतर हैं. इसी तरह तीन आयतें तीन ऊंटों से और चार आयतें चार ऊंटों से बेहतर हैं." 
(मिश्कात-उल-मसाबीह 522/2)


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नमाज़ की फ़ज़ीलत

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डॉ. फ़िरदौस ख़ान 
नमाज़, रूह का सुकून है, चेहरे का नूर है. क़ुरआन करीम में अल्लाह तआला ने बार-बार नमाज़ क़ायम करने का हुक्म दिया है.   
आज हम नमाज़ से वाबस्ता चन्द हदीसें आप सबके साथ साझा कर रहे हैं.   

सातवें आसमान पर अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को बैतूल मामूर से टेक लगाए बैठा देखा. हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम ने बताया कि बैतूल मामूर में रोज़ाना सत्तर हज़ार फ़रिश्ते नमाज़ पढ़ते हैं और एक बार निकलने के बाद दुबारा उनकी बारी नहीं आती. हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि ख़ुशआमदीद नेक बेटे, नेक नबी.
(सही मुस्लिम 16)       

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स इस हालत में अल्लाह से मुलाक़ात करे कि वह पाँचों नमाज़ें अदा करता था, तो उसे बख़्श दिया जाएगा/"
(मिश्कात-उल-मसाबीह 47)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "वक़्त पर अदा की हुई नमाज़ अल्लाह तआला को सब कामों से ज़्यादा पसंद है."
(मुसनद निसाई 867) 

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स किसी मस्जिद में चालीस रातें बाजमात नमाज़ पढ़े और उसकी इशा की नमाज़ की पहली रकअत फ़ौत न हो, अल्लाह तआला इस अमल के बदले उसके लिए जहन्नुम से आज़ादी लिख देता है."
(सुनन इब्ने माजा 798)  

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- " अगर लोग जान लें कि अज़ान देने और पहली सफ़ में नमाज़ पढ़ने का कितना सवाब है, फिर इसे हासिल करने के लिए क़िरआ अन्दाज़ी के सिवा कोई रास्ता न पायें, तो वो ज़रूर क़िरआ अन्दाज़ी करें."
(सही बुख़ारी 615)       

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स दो रकअत नमाज़ इस तरह अदा करे कि उनमें अपने दिल को दुनियावी ख़्यालात की तरफ मुतावज्जा न होने दे तो अल्लाह तआला उसके उसके पिछ्ते गुनाह बख़्श देता है."
(सही बुख़ारी 159)        

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स अच्छी तरह  ग़ुस्ल करता है, जैसा कि उसे हुक्म दिया गया है. फिर वह अपने घर से निकलता है, यहाँ तक कि जुमे में आता है. और ख़ुत्बे के दौरान ख़ामोश रहता है, यहाँ तक कि वह अपनी नमाज़ ख़त्म कर ले, तो यह उसके उन गुनाहों का  कफ़्फ़ारा होगा, जो उससे पहले के जुमे से इस जुमे तक हुए हैं."
(सुनन नसई 1404)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- " जो शख़्स पाबन्दी से नमाज़ पढ़ेगा, वह नमाज़ क़यामत के दिन उसके लिए नूर, दलील और निजात का सबब बनेगी."
(मुसनद अहमद 6576)  

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "बेशक मुसलमान बन्दा जब अल्लाह तआला की रज़ा के लिए नमाज़ अदा करता है, तो उसके गुनाह इस तरह झड़ जाते हैं जैसे दरख़्त के पत्ते झड़ते हैं."  
(मिश्कात-उल-मसाबीह 576)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़र्ज़ नमाज़ जानबूझकर तर्क न करना, क्योंकि जिस शख़्स ने जानबूझकर फ़र्ज़ नमाज़ तर्क कर दी, उससे अल्लाह तआला की ज़िम्मेदारी अमान उठ गई."
(मिश्कात-उल-मसाबीह 61)
   
हज़रत अबु हुरैरा रज़ियल्लाहू फ़रमाते हैं कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जब नमाज़ की इक़ामत हो जाए तो तुम दौड़ते हुए मत आओ, बल्कि सुकून को लाज़िम पकड़ो. जितनी नमाज़ पा लो, पढ़ लो. और जो नमाज़ तुमसे रह जाए, उसे मुकम्मल कर लो, क्योंकि तुम उस वक़्त भी नमाज़ में होते हो, जब तुम नमाज़ का इरादा करते हो."
(सही बुख़ारी 908, सही मुस्लिम 602, सुनन अल कुब्रा अल बयहक़ी 5871)   

फ़ज्र  
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़ज्र की दो रकअतें (सुन्नत) दुनिया और जो कुछ दुनिया में हैं, उस सबसे बेहतर हैं."
(सही मुस्लिम 725)   

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़ज्र की नमाज़ उस वक़्त पढ़ो, जब सुबह अच्छी तरह वाज़ेह हो जाए. क्योंकि इसमें ज़्यादा अज्र है."  
(सुनन इब्ने माजा 672) 

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़ज्र की नमाज़ बाजमात अदा करना सारी रात क़याम करने से अफ़ज़ल है." 
(सही मुस्लिम 1491)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जिसने फ़ज्र की नमाज़ पढ़ी, वह अल्लाह की पनाह में है, तो तुम अल्लाह की पनाह हाथ से जाने न दो."
(जामा तिमिज़ी 222)  

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स ठंडी नमाज़ें (फ़ज्र और अस्र) पढ़ेगा, वह जन्नत में दाख़िल होगा." 
(मिश्कात-उल-मसाबीह 625)

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़ज्र और अस्र की नमाज़ों में फ़रिश्ते बारी-बारी आते हैं और अल्लाह को जाकर तुम्हारे बारे में बताते हैं."
(सही बुख़ारी 555) 

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "फ़ज्र और इशा मुनाफ़िक़ों पर सबसे भारी नमाज़े हैं."
(सही बुख़ारी 657)

ज़ुहर 
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "अगर किसी को मालूम हो जाए कि ज़ुहर अव्वल वक़्त पढ़ने का कितना सवाब है, तो वह उसकी तरफ़ एक दूसरे से सबक़त ले जाने की कोशिश करेंगे."
(सुनन निसाई 673)    

अस्र
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "अस्र की नमाज़ तुमसे पहले लोगों पर पेश की गई थी, मगर उन्होंने इसे ज़ाया कर दिया, फिर जो शख़्स इसकी हिफ़ाज़त करेगा, उसे दोगुना अज्र मिलेगा." 
(सही मुस्लिम 820)
 

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रब से गुफ़्तगू

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मैंने कहा कि ऐ मेरे परवरदिगार ! मैं बहुत गुनाहगार हूं.
जवाब मिला : अल्लाह की रहमत से मायूस न हो. अल्लाह सब गुनाह बख़्श देगा. बेशक वह बड़ा बख़्शने वाला और बड़ा मेहरबान है.

मैंने कहा कि ऐ मेरे परवरदिगार ! मुझे तेरी मदद कैसे मिलेगी ?
जवाब मिला : सब्र और नमाज़ से मदद लिया करो.

मैंने कहा कि ऐ मेरे परवरदिगार ! मेरे दिल को सुकून नहीं है.
जवाब मिला : बेशक अल्लाह की याद से ही दिलों को सुकून और इत्मीनान मिलता है.

मैंने कहा कि ऐ मेरे परवरदिगार ! मैं बहुत तन्हा हूं.
जवाब मिला : बेशक हम तुम्हारी शह रग से भी ज़्यादा क़रीब हैं.

मैंने कहा कि ऐ मेरे परवरदिगार ! मुझे कोई याद नहीं करता.
जवाब मिला : तुम हमें याद करो, हम तुम्हें याद करेंगे.

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हर मर्ज़ का इलाज है

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डॉ फ़िरदौस ख़ान 
दुनिया में ऐसा कोई भी मर्ज़ नहीं है, जिसका इलाज न हो. मुख़तलिफ़ हदीसों से ये बात साबित है. इसलिए किसी भी मर्ज़ में मुब्तिला होने पर उसके इलाज पर ख़ास  तवज्जो देनी चाहिए.  

अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "बेशक अल्लाह तआला ने बीमारी और उसकी दवा दोनों नाज़िल फ़रमाई हैं. और हर बीमारी के लिए दवा बनाई है. लिहाज़ा इलाज करो, लेकिन हराम चीज़ से इलाज न करो."
(सुनन अबी दाउद 3874) 

अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "अल्लाह तआला ने कोई बीमारी ऐसी नाज़िल नहीं की, जिसके लिए उसने शिफ़ा नाज़िल न फ़रमाई हो." 
(सही बुख़ारी 5678) 

चित्र गूगल से साभार 
   

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चटनी से शुगर कंट्रोल करें

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-डॉ फ़िरदौस ख़ान
शुगर एक ऐसा मर्ज़ है, जो जान के साथ ही जाता है. अभी तक इससे निजात की कोई दवा नहीं बनी. इसलिए शुगर का मरीज़ बहुत परेशान रहता है. उसके खाने-पीने पर भी हज़ार पाबंदियां लग जाती हैं. वह पेटभर रोटी या चावल भी नहीं खा सकता. हाँ, इतना ज़रूर है कि दवाओं और खान-पान पर ध्यान रखकर इसे कंट्रोल किया जा सकता है. 
आज हम एक ऐसी चटनी का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसके सेवन से शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है. शुगर के कई मरीज़ों को इससे फ़ायदा हुआ है,

सामग्री : पुदीना, अदरक, लहसुन, अनारदाना. स्वादानुसार हरी मिर्च और नमक.
इन्हें दरदरा या महीन पीसकर चटनी बना लें और अपने भोजन में शामिल करें. इसके साथ ही खीरा, टमाटर, नीम्बू और दही को भी अपने भोजन में ज़रूर शामिल कर लें. इंशाअल्लाह इससे फ़ायदा होगा. 
हाँ, चिकित्सक के अनुसार दवाओं का सेवन नियमित रूप से करते रहें और शुगर की जाँच भी कराते रहें.

आपसे अनुरोध है कि अपने अनुभव भी लिखें, जिससे अन्य लोगों का भला हो सके.

चित्र : गूगल से साभार 


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या हुसैन

या हुसैन

بسم الله الرحمن الرحيم

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Allah hu Akbar

Allah hu Akbar
अपना ये रूहानी ब्लॉग हम अपने पापा मरहूम सत्तार अहमद ख़ान और अम्मी ख़ुशनूदी ख़ान 'चांदनी' को समर्पित करते हैं.
-फ़िरदौस ख़ान

This blog is devoted to my father Late Sattar Ahmad Khan and mother Late Khushnudi Khan 'Chandni'...
-Firdaus Khan

इश्क़े-हक़ी़क़ी

इश्क़े-हक़ी़क़ी
फ़ना इतनी हो जाऊं
मैं तेरी ज़ात में या अल्लाह
जो मुझे देख ले
उसे तुझसे मुहब्बत हो जाए

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