मज़दूरों का हक़
Author: Admin Labels:: मज़दूरों का हक़अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "मज़दूर का पसीना ख़ुश्क होने से पहले उसकी मज़दूरी अदा कर दो."
(सुनन इब्ने माजा 2443)
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "मैं क़यामत के दिन उस शख़्स के मुक़ाबिल रहूंगा, जो मज़दूर से पूरा काम ले और उसकी मज़दूरी न दे."
(सही बुख़ारी 2227)
(सही बुख़ारी 2227)
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "आदमी के गुनाहगार होने के लिए यही काफ़ी है कि वह अपने मातहतों की रोज़ी रोक ले."
(सही मुस्लिम 996)
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