चादर मुबारक
Author: Admin Labels:: सही बुख़ारीअल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चादर ओढ़ा करते थे. उनका ये पहनावा अल्लाह को बहुत पसंद था. इसलिए क़ुरआन पाक में अल्लाह ने अपने महबूब को ‘या अय्योहल मुदस्सिर’ यानी चादर ओढ़ने वाले कहकर पुकारा है.
(सही बुख़ारी : 358/3)
चाश्त की नमाज़
Author: Admin Labels:: नमाज़, नमाज़- चाश्तचाश्त की नमाज़ का सही वक़्त आफ़ताब के ख़ूब तुलूअ हो जाने पर शुरू होता है. चाश्त में कम से कम दो और ज़्यादा से ज़्यादा 12 अकअत पढ़ी जाती हैं.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चाश्त की चार रकअत पढ़ते थे और अल्लाह जिस क़द्र चाहता, उतनी पढ़ लेते. (सही मुस्लिम 719)
कितनी प्यारी दुआ है
Author: Admin Labels:: दुआبِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيم
إلهي كفى بي عِزًّا أن أكون لك عَبدًا، وكفى بي فخرًا أن تكون لي رَبًّا، أنت كما أُحب فاجعلني كما تُحب.
इलाही कफ़ा बी इज़्ज़न, अन अकुना लका अबदन
वा कफ़ा बी फ़ख़रन, अन तकुना लि रब्बन
अंता कमा उहिब्ब, फ़जअलनी कमा तोहिब
आमीन या रब्बुल आलेमीन
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है.
ऐ मेरे रब ! मेरी इज़्ज़त के लिए यही काफ़ी है कि मैं तेरा बन्दा हूं. और मेरे फ़ख़्र करने के लिए ये काफ़ी है कि तू मेरा परवरदिगार है. तू वैसा ही है, जैसा मैं चाहता हूं. बस तू मुझे ऐसा बना दे, जैसा तू चाहता है.
आमीन या रब्बुल आलेमीन
اچھا خواب
Author: Admin Labels:: خواب
رسول اللہ ﷺ نے فرمایا:
“اگر تم میں سے کوئی اچھا خواب دیکھے تو خوش ہو اور صرف اس کو بتائے جو اس سے محبت کرتا ہے۔”
حوالہ: صحیح مسلم ، حدیث نمبر: 5902
اس حدیث میں رسول اللہ ﷺ نے اچھے خواب کے بارے میں رہنمائی فرمائی ہے، یعنی اگر کسی شخص کو کوئی اچھا اور خوشی دینے والا خواب نظر آئے تو اسے چاہیے کہ وہ اللہ کا شکر ادا کرے اور خوش ہو، لیکن اس خواب کو ہر کسی کے سامنے بیان کرنے کے بجائے صرف ایسے شخص کو بتائے جو اس سے محبت کرتا ہو اور اس کے لیے خیر خواہ ہو، کیونکہ حسد یا غلط تعبیر کا اندیشہ بھی ہو سکتا ہے، اس سے یہ سبق ملتا ہے کہ مسلمان کو چاہیے کہ وہ اچھے خواب کو اللہ کی نعمت سمجھے اور اسے مناسب لوگوں کے ساتھ ہی بیان کرے، مثال کے طور پر اگر کسی کو کوئی نیک یا خوشی دینے والا خواب نظر آئے تو وہ اپنے قریبی اور خیر خواہ شخص کو بتا سکتا ہے تاکہ وہ اس کے لیے دعا کرے یا اچھی تعبیر بیان کرے، یہ حدیث ہمیں یہ بھی سکھاتی ہے کہ اسلام انسان کو زندگی کے ہر معاملے میں حکمت اور احتیاط اختیار کرنے کی تعلیم دیتا ہے۔
कामयाब हो गए ईमान वाले
Author: Admin Labels:: قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَलेकिन क़ुरआन कहता है-
قَدْ أَفْلَحَ الْمُؤْمِنُونَ
क़द अफ़लहल मोमिनून
यानी कामयाब हो गए ईमान वाले
और अल्लाह ने खाना भेज दिया...
Author: Admin Labels:: फ़िरदौस ख़ान की क़लम से, शेख़ज़ादी का वाक़िया साल 2005 का वाक़िया है. नवम्बर का महीना था. हम अपनी अम्मी के साथ उत्तर प्रदेश के एक गांव में गए हुए थे. गांव के एक बुज़ुर्ग के साथ हम घूमने निकले. उनके साथ कांग्रेस के एक नेता और उनके चाचा नवाब साहब भी थे. दोपहर हो गई. सबको बहुत भूख लगी थी. बुज़ुर्ग ने कहा कि बहुत भूख लग रही है. घर वापस लौटने में बहुत देर हो जाएगी और यहां दूर-दूर ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा, जहां जाकर कुछ खा-पी सकें. उनकी यह बात सुनकर हमारी अम्मी ने कहा- “मैं जहां भी जाती हूं, अल्लाह वहां खाना ज़रूर भेज देता है.” इस पर वे बुज़ुर्ग तंज़िया मुस्कराने लगे. अभी चन्द घड़ियां ही गुज़री थीं कि साईकिल पर सफ़ेद लिबास में एक शख़्स आया. उसने सबको सलाम किया और उन बुज़ुर्ग के हाथ में एक थैली थमाकर चला गया. उन्होंने थैली खोली, तो उसमें गरमा-गरम समौसे थे. नवाब साहब ने बुज़ुर्ग से उस शख़्स के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि वे उसे नहीं जानते.इस पर हमारी अम्मी ने बुज़ुर्ग से कहा- “क्या मैंने आपसे नहीं कहा था कि मैं जहां भी जाती हूं, अल्लाह वहां खाना ज़रूर भेज देता है.”
-डॉ. फ़िरदौस ख़ान
हमारी अम्मी ख़ुशनूदी ख़ान उर्फ़ चांदनी
(शेख़ज़ादी का वाक़िया)
#शेख़ज़ादी_का_वाक़िया 0 comments |
शेख़ज़ादी का वाक़िया
Author: Admin Labels:: फ़िरदौस ख़ान की क़लम से, शेख़ज़ादी का वाक़ियाये अल्लाह का एक बहुत बड़ा मौजिज़ा था. ऐसे थीं हमारी अम्मी. अल्लाह उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता करे, आमीन
(शेख़ज़ादी का वाक़िया)
#शेख़ज़ादी_का_वाक़िया
मुतमईनी
Author: Admin Labels:: फ़िरदौस ख़ान की क़लम से, सही मुस्लिममुतमईनी में ही सुकून है. इंसान को जो मिलता है, अगर वह उसी में ख़ुश रहना सीख ले, तो ज़िन्दगी आसान हो जाती है. वरना दुनिया के पीछे कितना ही भाग लो, चाह की कोई हद नहीं है. और इसी भागमभाग में एक दिन ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "तुम उस शख़्स की तरफ़ देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुम से कमतर हो और उस शख़्स की तरफ़ मत देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुमसे बड़ा हो, क्योंकि इस तरह तुम अल्लाह की नेअमतों को हक़ीर समझोगे."
(सही मुस्लिम 2963)
लोगों पर धोखे से भरे साल भी आएंगे
Author: Admin Labels::लोगों पर धोखे से भरे ऐसे साल भी आएंगे, जिनमें
* झूठे को सच्चा समझा जाएगा और सच्चे को झूठा.
* बद दयानत को अमानतदार समझा जाएगा और अमानतदार को बद दयानत.
* नाहल और हक़ीर शख़्स अवाम की नुमाइंदगी करेगा.


