रश्क
Author: Admin Labels:: सही बुख़ारीअल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि रश्क तो बस दो ही आदमियों पर हो सकता है. एक तो उस पर जिसे अल्लाह ने क़ुरआन मजीद का इल्म अता किया और वह इसके साथ रात की घड़ियों में खड़ा होकर नमाज़ पढ़ता रहा है और दूसरा आदमी वह जिसे अल्लाह तअला ने माल दिया और वह उसे मोहताजों पर रात-दिन ख़ैरात करता रहा.
(सही बुख़ारी : 5025)
0
comments |
(सही बुख़ारी : 5025)
