मुतमईनी
Author: Admin Labels:: फ़िरदौस ख़ान की क़लम से, सही मुस्लिमडॉ. फ़िरदौस ख़ान
मुतमईनी में ही सुकून है. इंसान को जो मिलता है, अगर वह उसी में ख़ुश रहना सीख ले, तो ज़िन्दगी आसान हो जाती है. वरना दुनिया के पीछे कितना ही भाग लो, चाह की कोई हद नहीं है. और इसी भागमभाग में एक दिन ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "तुम उस शख़्स की तरफ़ देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुम से कमतर हो और उस शख़्स की तरफ़ मत देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुमसे बड़ा हो, क्योंकि इस तरह तुम अल्लाह की नेअमतों को हक़ीर समझोगे."
(सही मुस्लिम 2963)
0
comments |
मुतमईनी में ही सुकून है. इंसान को जो मिलता है, अगर वह उसी में ख़ुश रहना सीख ले, तो ज़िन्दगी आसान हो जाती है. वरना दुनिया के पीछे कितना ही भाग लो, चाह की कोई हद नहीं है. और इसी भागमभाग में एक दिन ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "तुम उस शख़्स की तरफ़ देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुम से कमतर हो और उस शख़्स की तरफ़ मत देखो जो दुनिया के ऐतबार से तुमसे बड़ा हो, क्योंकि इस तरह तुम अल्लाह की नेअमतों को हक़ीर समझोगे."
(सही मुस्लिम 2963)
