मज़दूरी
Author: Admin Labels:: इब्ने माजा, सही बुख़ारी, सही मुस्लिमअल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि आदमी के गुनाहगार होने के लिए यही काफ़ी है कि वह अपने मातहतों की रोज़ी रोक कर रखे.
(सही मुस्लिम 996)
* अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- मज़दूर की मज़दूरी उसका पसीना सूखने से पहले दे दो.
(इब्ने माजा 2443)
* अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद sसल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- मैं क़यामत के दिन उस शख़्स के मुक़ाबिल रहूंगा, जो मज़दूर से पूरा काम ले और उसकी मज़दूरी न दे.
(सही बुख़ारी)
0
comments |
(सही मुस्लिम 996)
* अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- मज़दूर की मज़दूरी उसका पसीना सूखने से पहले दे दो.
(इब्ने माजा 2443)
* अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद sसल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- मैं क़यामत के दिन उस शख़्स के मुक़ाबिल रहूंगा, जो मज़दूर से पूरा काम ले और उसकी मज़दूरी न दे.
(सही बुख़ारी)
