चाश्त की नमाज़
Author: Admin Labels:: नमाज़, नमाज़- चाश्तचाश्त की नमाज़ का सही वक़्त आफ़ताब के ख़ूब तुलूअ हो जाने पर शुरू होता है. चाश्त में कम से कम दो और ज़्यादा से ज़्यादा 12 अकअत पढ़ी जाती हैं.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चाश्त की चार रकअत पढ़ते थे और अल्लाह जिस क़द्र चाहता, उतनी पढ़ लेते. (सही मुस्लिम 719)
अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया-"जो शख़्स उस वक़्त खड़ा हो जब सूरज बुलन्द हो चुका हो, फिर अच्छी तरह वुज़ू करके दो रकअत नमाज़ पढ़े, तो उसके गुनाह बख़्श दिए जाएंगे और वह ऐसे हो जाएगा जैसे उसकी माँ ने उसे उसी दिन जन्म दिया हो. (मुसनद अहमद 2250)
अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स चाश्त की नमाज़ के लिए निकले और उसका उस नमाज़ के सिवा कोई और मक़सद न हो, तो उसका अज्र उमरा करने वाले के अज्र के बराबर है. (सुनन अबू दाऊद 558)
अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "चाश्त की नमाज़ की हिफ़ाज़त सिर्फ़ वही शख़्स करता है, जो अल्लाह की तरफ़ बहुत ज़्यादा रुजू करने वाला हो. और ये नमाज़ अल्लाह की तरफ़ बहुत ज़्यादा रुजू करने वालों की नमाज़ है."
(मुस्तदरक हाकिम 1182)
अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो शख़्स चाश्त की दो रकअत को हमेशा पढ़ता रहे, उसके गुनाह बख़्श दिए जाएंगे, अगर्चे वोह समन्दर के झाग के बराबर हों."
अल्लाह के आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "चाश्त की दो रकअतें इंसान के बदन के हर जोड़ का सदक़ा अदा कर देती हैं."
(सही मुस्लिम 720)

