सदक़ा...

Author: फ़िरदौस ख़ान Labels:: , , ,


सिर्फ़ रुपये-पैसे देना ही सदक़ा नहीं हुआ करता. अल्लाह को ख़ुश करने का हर अमल सदक़ा है. हर वो काम सदक़ा है, जिससे दूसरों का भला हो. सदक़े में बहुत-सी चीज़ें शामिल हैं.
प्यारे नबी हज़रत मुहम्‍मद (सल्‍लललाहु अलैहि वसल्‍लम) ने फ़रमाया-
मोमिन का हर अच्छा अमल सदक़ा है. (बुख़ारी)
आपने फ़रमाया-
* लोगों के दरमियान इंसाफ़ करना सदक़ा है, किसी को जानवर पर चढ़ने में मदद करना सदक़ा है. किसी का सामान उठा * देना सदक़ा है, अच्छी बात कहना सदक़ा है, नमाज़ की ओर क़दम बढ़ाना सदक़ा है, रास्ते में से नुक़सादेह चीज़ों को हटाना सदक़ा (बुख़ारी)
* शौहर का अपनी बीवी को घर के कामकाज में मदद करना भी सदक़े में शुमार होगा.
* अपने मोमिन भाई कि ओर देखकर मुस्कराना भी सदक़ा है ( तिरमिजि)

प्यारे नबी हज़रत मुहम्‍मद (सल्‍लललाहु अलैहि वसल्‍लम) ने फ़रमाया-  क़यामत के दिन मोमिन के सदक़ात उसके लिए छांव बनेंगे (तिरमिजी)
सलफ़ सालेहीन ने कहा-
* सदक़ा अल्लाह के गु़स्से को ठंडा करता है
* सदक़ा गुनाहों का कफ़्फ़ारा है
* सदक़ा तकलीफ़-मुसीबत दुर करता है
* सदक़ा हिदायत मिलने या हिदायत में इज़ाफ़ा होने का सबब है

यानी हर नेक काम सदक़ा है... किसी को दुआ देना सदक़ा है. इसी तरह इल्म सिखाना भी सदक़ा है.
किसी ज़रूरतमंद की मदद करना भी सदक़ा ही है.
किसी को अच्छा मशवरा देना भी सदक़ा है
किसी को अपना वक़्त देना भी सदक़ा है.
किसी को तरबियत देना भी सदक़ा है.
मुश्किल वक़्त में हौसला या तसल्ली देना भी सदक़ा है.
नेकी की राह दिखाना भी सदक़ा है.
बुराई से रोकना भी सदक़ा है.
किसी भटके हुए को रास्ता बताना भी सदक़ा है.
किसी प्यासे को पानी पिलाना भी सदक़ा है.
किसी भूखे को खाना खिलाना भी सदक़ा है.
परिन्दों के लिए दाना-पानी रखना भी सदक़ा है.
नरमी से बात करना भी सदक़ा है.
माफ़ करना भी सदक़ा है.
किसी की ख़ुशी में शामिल होना भी सदक़ा है.
बीमार की तीमारदारी करना भी सदक़ा है.
बीमार की ख़ैरियत पूछना भी सदक़ा है.
मुस्कराहट से मिलना भी सदक़ा है.

आप सबसे ग़ुज़ारिश है कि राहे-हक़ की हमारी कोई भी तहरीर आपको अच्छी लगे, तो उसे दूसरों तक ज़रूर पहुंचाएं... हो सकता है कि हमारी और आपकी कोशिश से किसी का भला हो जाए.
-फ़िरदौस ख़ान


तस्वीर गूगल से साभार

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अपना ये रूहानी ब्लॉग हम अपने पापा मरहूम सत्तार अहमद ख़ान और अम्मी ख़ुशनूदी ख़ान 'चांदनी' को समर्पित करते हैं.
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This blog is devoted to my father Late Sattar Ahmad Khan and mother Late Khushnudi Khan 'Chandni'...
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