86 सूर: अत-तारीक़

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मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 17 आयतें हैं.
अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है
1.  आसमान और रात को आने वाले की क़सम
2. क्या तुमको मालूम है रात को आने वाला क्या है
3. वह चमकता हुआ तारा है
4. ऐसा कोई शख़्स नहीं, जिस पर निगरानी करने वाला मुक़र्रर नहीं
5. इंसान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा हुआ
6. वह उछलते हुए पानी से पैदा हुआ
7. जो कमर और पसलियों के बीच से निकलता है
8. बेशक ख़ुदा उसे दोबारा पैदा करने की ताक़त रखता है
9. जिस दिन दिलों के भेद परखे जाएंगे
10. तब उसका न ज़ोर चलेगा और न कोई मददगार होगा
11. चक्कर खाने वाले आसमान की क़सम
12. और फटने वाली (ज़मीन की क़सम)
13. बेशक ये क़ुरआन क़ौले-फ़ैसल है
14. यह कोई हंसी-मज़ाक़ नहीं
15. बेशक ये काफ़िर चालें चल रहे हैं
16. और मैं अपनी तदबीर कर रहा हूं
17. तो काफ़िरों को मोहलत दो, बस उन्हें थोड़ी-सी मोहलत दो
.......
हमने क़ुरआन करीम को आम ज़ुबान में पेश करने की कोशिश की है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग क़ुरआन को पढ़ सकें, समझ सकें और उन तक क़ुरआन का पैग़ाम पहुंच सके. तर्जुमा आलिमों का ही है.
-फ़िरदौस ख़ान 

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بسم الله الرحمن الرحيم

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Allah hu Akbar

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अपना ये बलॊग हम अपने पापा मरहूम सत्तार अहमद ख़ान को समर्पित करते हैं...
-फ़िरदौस ख़ान

This blog is devoted to my father Late Sattar Ahmad Khan...
-Firdaus Khan

इश्क़े-हक़ी़क़ी

इश्क़े-हक़ी़क़ी
फ़ना इतनी हो जाऊं
मैं तेरी ज़ात में या अल्लाह
जो मुझे देख ले
उसे तुझसे मुहब्बत हो जाए

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